इसके बाद अमेरिका के वैज्ञानिकों का दल था, वे आते ही चढ़ बैठे- "आप विश्व हित की टेक्नोलाजी को छुपा रहे हो। आप वसुदैव कुटूंबकम की हिंदू संस्कृती भूल गये हो।" हमने पूछा कि भाई मामला क्या है। वे और भड़क गये- " आपके यहां गायें खुल्ला घूमती है, उनके पीछे गोबर इकठ्ठा करने के लिये भागना पड़ता है। फ़िर भी आप उस गोबर से मीथेन गैस बना, इंधन के मामले में आत्म निर्भर हो गये। और हम है कि दस हजार गायें एक एक फ़ार्म मे पालते है, सबका गोबर आटॊमेटिक एकठठा हो जाता है। फ़िर भी हम उसका उपयोग करने मे असमर्थ हैं।" हमने कहा- " हम आपको गोबर की तकनीक विशेष शर्तो पर उपलब्ध करा सकते हैं। इस तकनीक में काम आने वाला गौ मूत्र, शुद्ध भारतीय होगा और यह गोमूत्र आपको सौ डालर प्रति लीटर पर खरीदना होगा
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