नव रचना की ओर अग्रसर पुस्तक - "क्या प्यार इसी को कहते हैं ?" ... इसी पुस्तक के कुछ अंश -
" ...
तूफानी रात तो जैसे तैसे गुजर गई, पर दोनों ... नेहा और प्रेम अंजान रहे कि क्या हुआ, क्यों रात तूफ़ान की तरह करवट बदलते रही ... एक तरफ नेहा तो दूसरी तरफ प्रेम ... दोनों के दोनों सुबह होने पर भी कुछ बेचैनी महसूस कर रहे थे ... दरअसल बेचैनी का सबब कुछ और नहीं था उन दोनों के अन्दर समा...
" ...
तूफानी रात तो जैसे तैसे गुजर गई, पर दोनों ... नेहा और प्रेम अंजान रहे कि क्या हुआ, क्यों रात तूफ़ान की तरह करवट बदलते रही ... एक तरफ नेहा तो दूसरी तरफ प्रेम ... दोनों के दोनों सुबह होने पर भी कुछ बेचैनी महसूस कर रहे थे ... दरअसल बेचैनी का सबब कुछ और नहीं था उन दोनों के अन्दर समा...
0 comments:
Post a Comment