तैंतीस महीने तक काटीं, तुमने जेबें खूब!
दो रूपये की राहत से, नहीं मिटेगी हूक!!
नहीं मिटेगी हूक, कमर जनता की तोड़ी!
सबक सिखाएगी पब्लिक, भूलेगी थोड़ी!!
पूरनमासी चाँद बना दी, खरी कमाई!
तरसाती ही रही, अभी तक ये महंगाई
दो रूपये की राहत से, नहीं मिटेगी हूक!!
नहीं मिटेगी हूक, कमर जनता की तोड़ी!
सबक सिखाएगी पब्लिक, भूलेगी थोड़ी!!
पूरनमासी चाँद बना दी, खरी कमाई!
तरसाती ही रही, अभी तक ये महंगाई
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