"मेरी अस्थियाँ पवित्र सिन्धु नदी में ही उस दिन प्रवाहित करना जब सिन्धु नदी एक स्वतन्त्र नदी के रूप मे भारत के ध्वज के तले बहने लगे भले ही इस में कितने ही वर्ष लग जाये ..कितनी ही पिदिया जन्म ले लेवे लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित नहीं करना .... "------------नाथूराम गोडसे |||||||
माँ भारती के इस सच्चे सपूत के चरणों में कोटि कोटि नमन .....
माँ भारती के इस सच्चे सपूत के चरणों में कोटि कोटि नमन .....
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